भूलकर भी कार में न लगवाएं ये 5 Accessories: भारी नुकसान और चालान!

कार में कौन सी एक्सेसरीज़ नहीं लगवानी चाहिए - carexperthindi

आज के दौर में जब कोई नई कार खरीदता है, तो उसके मन में गाड़ी को सजाने और उसमें नए-नए फीचर्स जुड़वाने का एक अलग ही क्रेज होता है। कार कंपनियां भी मुनाफा कमाने के चक्कर में बेस और मिडिल वेरिएंट्स में बहुत कम फीचर्स देती हैं। ऐसे में ग्राहकों के पास शोरूम से गाड़ी निकालने के बाद सीधे बाहर के कार बाजार (आफ्टरमार्केट) जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचता। बाजार में सीट कवर से लेकर फैंसी लाइट्स और बड़े म्यूजिक सिस्टम जैसी हजारों Car Accessories (कार एक्सेसरीज़) बहुत कम दामों में मिल जाती हैं।

लेकिन क्या आपको पता है कि कार को चमकाने और एडवांस बनाने के चक्कर में कुछ ऐसी एक्सेसरीज़ भी हैं जो आपकी गाड़ी के लिए टाइम बम साबित हो सकती हैं? कई बार ये गलत एक्सेसरीज़ कार में अचानक आग लगने, एक्सीडेंट के समय सुरक्षा फीचर्स के फेल होने, कार की कंपनी वारंटी खत्म होने और यहाँ तक कि इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट होने का सबसे बड़ा कारण बन जाती हैं।

अगर आप अपनी गाड़ी, अपनी जेब और अपने परिवार की जान से प्यार करते हैं, तो कार बाजार जाने से पहले जान लीजिए कि आपको अपनी गाड़ी में कौन सी एक्सेसरीज़ भूलकर भी नहीं लगवानी चाहिए और RTO के नियम क्या कहते हैं।


भूलकर भी न लगवाएं ये 5 खतरनाक एक्सेसरीज़

1. एयरबैग वाली सीटों पर बाहर के सीट कवर (Seat Covers in Airbag Cars)

आजकल भारत सरकार के नियमों के अनुसार लगभग सभी नई गाड़ियों में 6 एयरबैग्स आना जरूरी हो गए हैं। इनमें से दो एयरबैग्स आगे की दोनों सीटों (ड्राइवर और बगल वाली सीट) के साइड में छिपे होते हैं, जिन्हें ‘साइड एयरबैग्स’ कहा जाता है।

  • सबसे बड़ा खतरा: जब आप बाहर किसी लोकल दुकान से कार में फैंसी या टाइट लेदर के सीट कवर लगवाते हैं, तो वे पूरी सीट को कसकर ढक देते हैं। एक्सीडेंट के समय जब कार के कंप्यूटर द्वारा साइड एयरबैग को खुलने का सिग्नल मिलता है, तो ये मजबूत सीट कवर एयरबैग को बाहर नहीं आने देते।
  • जान का नुकसान: एयरबैग न खुलने के कारण एक्सीडेंट के समय इंसान सीधे कार के दरवाजों या पिलर से टकरा जाता है, जिससे जान भी जा सकती है।

2. स्टीयरिंग व्हील स्पिनर / नॉब (Steering Wheel Spinner Knob)

इसे बहुत से लोग स्टीयरिंग पर लगने वाला ‘लट्टू’ भी कहते हैं। लोग इसे इसलिए लगवाते हैं ताकि कार बैक करते समय या मोड़ते समय सिर्फ एक हाथ से स्टीयरिंग व्हील को तेजी से घुमाया जा सके। यह दिखने में जितना आरामदायक लगता है, असल में उतना ही खतरनाक है।

  • हादसे का डर: हाईवे पर जब गाड़ी 80 या 100 की स्पीड में होती है, तब स्टीयरिंग का स्थिर होना बहुत जरूरी है। तेज रफ्तार में अगर आपका हाथ गलती से इस नॉब से टकरा जाए या आपके कपड़े (जैसे ढीली आस्तीन या घड़ी) इसमें फंस जाएं, तो गाड़ी अचानक मुड़ सकती है और कार तुरंत पलट सकती है। इसके अलावा, एक्सीडेंट के समय ड्राइवर का सीना सीधे इस सख्त नॉब से टकराता है, जिससे पसलियां टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

3. मोटे फ्लोर मैट और फर्श का लैमिनेशन (Floor Mats and Lamination)

गाड़ी के फर्श को गंदा होने और पानी से बचाने के लिए लोग पूरी कार के नीचे प्लास्टिक या लेदर का लैमिनेशन करवा देते हैं या मोटे-मोटे 7D/9D फ्लोर मैट बिछा देते हैं।

  • पैडल फंसने का रिस्क: बाहर से लगवाए गए ये मैट अक्सर कार के नीचे के पैडल एरिया (एक्सेलेरेटर, ब्रेक और क्लच) के साइज के हिसाब से परफेक्ट नहीं होते। गाड़ी चलाते समय कई बार ऐसा होता है कि कार का एक्सेलेरेटर (रेस वाला पैडल) इन मोटे मैट के नीचे फंस जाता है और गाड़ी अपने आप पूरी रफ्तार में भागने लगती है। ऐसी स्थिति में ब्रेक दबाने पर भी गाड़ी नहीं रुकती।
  • जंग का खतरा: कार लैमिनेशन कराने से फर्श के नीचे की नमी बाहर नहीं निकल पाती, जिससे कार की पूरी बॉडी में अंदर ही अंदर जंग (Rust) लगने लगती है और कुछ ही सालों में कार का फर्श गल जाता है।

4. हैवी आफ्टरमार्केट लाइट्स और वायरिंग कटिंग (Heavy Lights & Wire Cutting)

रात के समय सड़क पर तेज रोशनी के लिए बहुत से लोग कार की कंपनी वाली हेडलाइट को हटाकर बहुत तेज वॉट की LED या HID लाइट्स लगवा लेते हैं। इसके अलावा कार के अंदर एम्बिएंट लाइटिंग और भारी म्यूजिक सिस्टम लगवाने का भी बहुत क्रेज है।

  • शॉर्ट-सर्किट से आग: इन एक्सेसरीज़ को ऑन करने के लिए कार की ओरिजिनल वायरिंग से छेड़छाड़ की जाती है। लोकल मैकेनिक अक्सर तारों को बीच से काट देते हैं और उन पर सस्ता सेलोटेप चिपका देते हैं। जब इन हैवी लाइट्स के कारण कार के इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर लोड बढ़ता है, तो तार आपस में शॉर्ट-सर्किट हो जाते हैं। भारत में कारों में अचानक आग लगने का सबसे बड़ा कारण यही आफ्टरमार्केट वायरिंग कटिंग होती है।

5. क्रैश गार्ड या बुल बार (Crash Guards / Bull Bars)

अपनी कार को आगे और पीछे से स्क्रैच या डेंट से बचाने के लिए लोग लोहे या स्टील के बड़े-बड़े बंपर गार्ड (क्रैश गार्ड) लगवा लेते हैं। बहुत से लोगों को लगता है कि इससे उनकी कार मजबूत हो जाएगी, लेकिन सच इसके बिल्कुल उलट है।चूहों से कार के कीमती वायर (Wires) को कैसे बचाएं? 5 आसान और घरेलू तरीके

  • सुरक्षा फीचर्स फेल होना: आधुनिक कारों का अगला हिस्सा इस तरह से बनाया जाता है कि एक्सीडेंट होने पर वह खुद पिचक जाए ताकि झटके का असर केबिन के अंदर बैठे लोगों तक न पहुँचे। जब आप आगे लोहा लगा देते हैं, तो एक्सीडेंट का पूरा झटका सीधे कार के चेसिस और अंदर बैठे लोगों पर लगता है। इसके अलावा, क्रैश गार्ड लगे होने के कारण कार के फ्रंट सेंसर एक्सीडेंट को भांप नहीं पाते और कार के मुख्य एयरबैग्स खुलते ही नहीं हैं।

कार वारंटी और इंश्योरेंस क्लेम में होगी भारी दिक्कत!

अगर आप ऊपर बताई गई गलत एक्सेसरीज़ लगवाते हैं, तो मुसीबत सिर्फ एक्सीडेंट तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आपकी जेब पर भी बहुत बड़ा डेंट लगता है:

  • कंपनी की वारंटी तुरंत खत्म (Warranty Void): कार कंपनियां अपनी गाड़ियों की वायरिंग और इलेक्ट्रिकल सिस्टम की पूरी जांच करके उसे मार्केट में उतारती हैं। अगर आप बाहर से कोई भी ऐसी एक्सेसरी लगवाते हैं जिसके लिए कार की मूल तार को काटा या छीला गया हो, तो कंपनी आपकी कार की पूरी इलेक्ट्रिकल वारंटी को तुरंत खत्म कर देती है। इसके बाद अगर कार के इंजन, ईसीयू (ECU) या किसी भी पार्ट में खराबी आती है, तो कंपनी ₹1 की भी मदद नहीं करेगी और सारा खर्च आपको उठाना पड़ेगा।
  • इंश्योरेंस क्लेम हो जाएगा रिजेक्ट (Insurance Claim Rejected): एक्सीडेंट के बाद जब आप कार को ठीक कराने के लिए इंश्योरेंस कंपनी के पास जाते हैं, तो उनका सर्वेक्षक (Surveyor) पूरी गाड़ी की जांच करता है। अगर उसे पता चला कि कार में क्रैश गार्ड लगा था जिसकी वजह से एयरबैग नहीं खुले, या वायरिंग कटिंग की वजह से कार में आग लगी थी, तो इंश्योरेंस कंपनी आपके क्लेम को सीधे रिजेक्ट (खारिज) कर देगी। यानी लाखों की गाड़ी का नुकसान आपको खुद भुगतना पड़ेगा।

RTO के नियम: कब कटेगा भारी चालान और कब सीज होगी गाड़ी?

भारत सरकार के मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) के तहत कार में किसी भी तरह का ऐसा मॉडिफिकेशन कराना सख्त मना है जो गाड़ी की मूल संरचना या दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालता हो।

  1. बुल बार/क्रैश गार्ड पर पूरी तरह बैन: आरटीओ (RTO) के नियमों के अनुसार कार के आगे या पीछे लोहे का गार्ड लगाना पूरी तरह से गैरकानूनी है। पकड़े जाने पर पुलिस आपका ₹5,000 तक का भारी चालान काट सकती है और कोर्ट के चक्कर काटने पड़ सकते हैं।
  2. तेज रोशनी वाले बल्ब: अगर आप कंपनी द्वारा तय की गई वॉट से ज्यादा तेज रोशनी वाले बल्ब या ऐसी LED लाइट्स लगाते हैं जिससे सामने से आने वाले ड्राइवर की आंखें चौंधिया जाएं, तो पुलिस आपकी गाड़ी का चालान काट सकती है और आपकी गाड़ी को सीज (जब्त) भी किया जा सकता है।

तो फिर कौन सी एक्सेसरीज़ लगवा सकते हैं जिससे कोई दिक्कत न हो?

ऐसा नहीं है कि आप कार में बाहर से कुछ भी नहीं लगवा सकते। अगर आप समझदारी से काम लें, तो अपनी गाड़ी की वारंटी और इंश्योरेंस को बचाते हुए नीचे दी गई सुरक्षित एक्सेसरीज़ आराम से लगवा सकते हैं:

  • प्लग एंड प्ले (Plug & Play) डैशकैम: आप अपनी सुरक्षा के लिए कार में डैशकैम लगवा सकते हैं, बशर्ते वह कार के 12V चार्जिंग सॉकेट (सिगरेट लाइटर पोर्ट) से कनेक्ट होता हो। इसमें कोई तार काटने की जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए वारंटी पर कोई आंच नहीं आती।
  • कंपनी के शोरूम से जेन्युइन एक्सेसरीज़ (Genuine Accessories): अगर आपको सीट कवर, अलॉय व्हील, क्रोम गार्निश या म्यूजिक सिस्टम अपग्रेड कराना ही है, तो सीधे कार कंपनी के अधिकृत शोरूम से ही करवाएं। शोरूम से काम कराने पर कंपनी बकायदा बिल देती है और कार की वारंटी पूरी तरह सुरक्षित रहती है।
  • सॉफ्ट या कंपैटिबल फ्लोर मैट: आप अपनी गाड़ी में कंपनी की फिटिंग वाले 3D या नॉर्मल रबर मैट का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो पैडल एरिया से दूर रहते हैं और एक्सेलेरेटर या ब्रेक को दबाने में कोई रुकावट पैदा नहीं करते।
  • विंडो सनशेड (RTO अप्रूव्ड): आप धूप से बचने के लिए कार की खिड़कियों पर हटाने वाले (Removable) सनशेड लगा सकते हैं। ध्यान रहे कि शीशों पर काली फिल्म (Tinted Glass Film) लगाना गैरकानूनी है, लेकिन जाली वाले सनशेड से कोई दिक्कत नहीं होती।सर्दियों और बरसात में कार के शीशों पर फॉग (धुंध) जमने से कैसे रोकें? 5 जादुई ट्रिक्स

निष्कर्ष (Conclusion)

अपनी लाखों रुपये की कार में सिर्फ ₹2,000 से ₹5,000 बचाने के चक्कर में किसी लोकल या अनाड़ी मैकेनिक से काम न करवाएं। कार एक्सेसरीज़ खरीदते समय हमेशा ‘दिखावे’ से ज्यादा ‘सुरक्षा और नियमों’ को प्राथमिकता दें। ऐसी किसी भी चीज़ पर पैसा बर्बाद न करें जो आपकी कार की ओरिजिनल वायरिंग या सुरक्षा फीचर्स के साथ खिलवाड़ करती हो। समझदारी से चुनी गई सही एक्सेसरीज़ आपकी गाड़ी की लाइफ भी बढ़ाएगी और आपको हर तरह के कानूनी झंझटों से भी दूर रखेगी।

सस्ती और नकली एक्सेसरीज़ के चक्कर में अपनी मेहनत की कमाई और अनमोल जिंदगी को खतरे में बिल्कुल न डालें!


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5 responses to “भूलकर भी कार में न लगवाएं ये 5 Accessories: भारी नुकसान और चालान!”

  1. […] किनके लिए ज़रूरी है: अगर आप किसी समुद्र के किनारे वाले इलाके (जैसे मुंबई, चेन्नई या गुजरात के तटीय शहर) में रहते हैं जहाँ हवा में नमक और नमी बहुत ज़्यादा होती है, तभी इसकी ज़रूरत पड़ती है। दिल्ली, पंजाब, राजस्थान या यूपी जैसे राज्यों में इसकी कोई ज़रूरत नहीं होती। भूलकर भी कार में न लगवाएं ये 5 Accessories: भारी… […]

  2. […] बैटरी और अल्टरनेटर पर लोड: सुबह के समय कार की बैटरी पर इंजन को क्रैंक (स्टार्ट) करने का सबसे भारी लोड होता है। उसी समय हीटर का भारी-भरकम ब्लोअर ऑन कर देने से कार के इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर एक्स्ट्रा दबाव पड़ता है। भूलकर भी कार में न लगवाएं ये 5 Accessories: भारी… […]

  3. […] सवाल: नई कार खरीदते समय कितनी सेफ्टी रेटिंग (Safety Rating) होनी चाहिए?जवाब: पहली बार कार खरीदते समय सुरक्षा से कभी समझौता न करें। कोशिश करें कि आप जो भी कार चुन रहे हैं, उसकी ग्लोबल एनकैप (Global NCAP) या भारत एनकैप (Bharat NCAP) क्रैश टेस्ट में कम से कम 4-Star या 5-Star सेफ्टी रेटिंग ज़रूर हो। टाटा और महिंद्रा की कई बजट कारें 5-स्टार सुरक्षा के साथ आती हैं। भूलकर भी कार में न लगवाएं ये 5 Accessories: भारी… […]

  4. […] काम की टिप: कार का PDI (Pre-Delivery Inspection – डिलीवरी से पहले का निरीक्षण) त्योहार से 2 या 3 दिन पहले शांत माहौल में डीलर के यार्ड में जाकर खुद करें। गाड़ी की लाइटें, पेंट, टायर और अंदर का केबिन अच्छे से चेक कर लें और अपनी कार का चेसिस नंबर नोट कर लें। धनतेरस के दिन शोरूम केवल शुभ मुहूर्त में चाबी लेने और मिठाई खाने जाएं। इससे आपका कीमती समय भी बचेगा और मानसिक शांति भी रहेगी। भूलकर भी कार में न लगवाएं ये 5 Accessories: भारी… […]

  5. […] Tata Tiago चाहे Petrol हो या EV, दोनों का battery replacement system बिल्कुल अलग है। Petrol Tiago में ₹5,000-₹6,000 का एक normal routine maintenance खर्चा है जो हर 4 साल में आता है। वहीं Tiago EV की upfront battery cost सुनने में ज़रूर बड़ी लगती है, पर Tata की solid 8 Years/Lifetime warranty policy और नए BaaS (Battery-as-a-Service) model ने ग्राहकों के इस डर को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया है। आप अपने budget और variant के हिसाब से सही option चुन सकते हैं! भूलकर भी कार में न लगवाएं ये 5 Accessories: भारी… […]

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